हम है पर हमारा क्या है ,
दो पल की ज़िन्दगी बस, इसमें किनारा क्या है,
दूंदते रहते है हम अपने मुक़दर को,
हमे तो ये भी नहीं पता की ढूँढने का बहाना क्या है,
पास हमारे है बहुत कुछ, पर इन आँखों का पैमाना क्या है,
हर इन्सान के चेहरे पर लगा है एक मुखोटा,
पर जान कर भी तू अंजना क्या है ,
बहुत कुछ छुट जायेगा इस अन्खरी साँस में,
इस अजनबी महफ़िल में दिल लगाना क्या है.
दो पल की ज़िन्दगी बस, इसमें किनारा क्या है,
दूंदते रहते है हम अपने मुक़दर को,
हमे तो ये भी नहीं पता की ढूँढने का बहाना क्या है,
पास हमारे है बहुत कुछ, पर इन आँखों का पैमाना क्या है,
हर इन्सान के चेहरे पर लगा है एक मुखोटा,
पर जान कर भी तू अंजना क्या है ,
बहुत कुछ छुट जायेगा इस अन्खरी साँस में,
इस अजनबी महफ़िल में दिल लगाना क्या है.

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