Tuesday, February 1, 2011

इनसे भी बातें होती है ......!!


परछाइयों से भी बातें होती है 
अफ़साने खो जाते है तो  तनहाइयों से भी बातें होती है!
ढूँढती रहती रही मैं उन आवाजों को
जिन्होंने दस्तक देना छोड़ दिया 
फिर याद आया कि ख़ामोशी से भी बातें होती है!
हमने बहुत ढूँढा उन्हें अपने सपनो में
पर इन सूजी आँखों ने सपने भी ना दिखाए
फिर ढूँढना पड़ा वो आशियाना जहाँ हकीक़त से भी बातें होती है!
ख्वाबों में जीना हमारी आदत नहीं हकीक़त के पंख लगाये थे हमने भी
पर एहसास हुआ कि जख्म भरे घाव से भी बातें होती है!
वह किनारा भी दूर से पुकारता है कश्ती को
लहरों को चीरती कश्ती ने कभी ये भी ना सोचा कि, प्यासी ख़ामोशी की समुद्र से भी बातें होती है !
जब भी पिया गम भुलाने के लिए ,उन प्यासी होंटों ने कभी ये भी ना सोचा कि उस अनजान पैमाने से भी बातें होती है.......!!   

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